सुविचार 3115
आदमी अगर एक बार भी गहराई से सोच ले तो शायद इंसान बन जाये….
आदमी अगर एक बार भी गहराई से सोच ले तो शायद इंसान बन जाये….
मैं भीड़ नहीं हूँ दुनिया की, मेरे अंदर ही एक जमाना है…!
_ किरदार जिनके खुद के मरम्मत मांग रहे हैं.
एक पन्ना जिंदगी का मैं, रोज मोड़ देता हूँ !!
_ पर सज़ा वहां मिली जहां बेकसूर थे !!
गलतियाँ हमें इंसान बनाती हैं, असफलताएं हमें बढ़ने में मदद करती हैं, _ आशा हमें चलती रहती है और प्रेम ही वह कारण है जिससे हम जीवित हैं _ सीखते रहें, प्यार करते रहें और जीते रहें.
_ दोनों का आनन्द समभावी बन कर लेने की कोशिश कीजिए, जीवन सुखमय होगा.