सुविचार 4875
एक बार निर्णय पर पहुंच कर क्रियान्वयन की अवस्था में परिणाम की जिम्मेदारी
और उस की चिंता को ताक पर रख देना चाहिए.
और उस की चिंता को ताक पर रख देना चाहिए.
और शिकायत में मिलता कुछ नहीं, खोता बहुत है;
आपकी खैरियत नही चाहता है..
प्यासे की प्यास तो दरिया ही बुझा पाता है..
इसलिए अधिक न सोचें…केवल संघर्ष पथ पर चलते रहें..मुकाम नजदीक है..!!!
निष्ठा, सहानुभूति, सम्मान..ये ऐसे भाव हैं जो परायों को भी अपना बनाते हैं.
_ वक़्त सूरज को भी हर रोज़ बुझा देता है….!!
जिनको ठोकरों से बचना सिखाया..
यह जानते हुए भी कि यहाँ कुछ स्थिर नहीं है.
यदि आपके पास पीछे से आने का दिल है तो आपको नेतृत्व करने की आवश्यकता नहीं है.