मस्त विचार 2937
” सारी दुनिया कहती हो,
अगर मुझे सही नहीं लग रहा, तो मैं उसे सही नहीं मान सकता,”
अगर मुझे सही नहीं लग रहा, तो मैं उसे सही नहीं मान सकता,”
कि हम जो देखना चाहेंगे, हमें वही नज़र आने लगता है.
पहाड़ पर चढ़ो ताकि तुम दुनिया देख सको, इसलिए नहीं कि दुनिया तुम्हें देख सके.
_ हम भी तो देखें, कौन कितना तलबगार है हमारा…
_ ये बात अब भी मुझे याद है कि “तू कभी मेरा प्यार था”
कोशिश कीजियेगा कि यादें अच्छी बनी रहें…!!
_ यह भी जरूरी है कि आंखें खुली रहे.
उदारता हमारी स्वाभाविक दशा है.