मस्त विचार 2933
ना किसी से ईर्ष्या ना किसी से कोई होड़,
मेरी अपनी मंजिलें मेरी अपनी दौड़.
मेरी अपनी मंजिलें मेरी अपनी दौड़.
गुरूर की जंग में अक्सर जुदाई जीत जाया करती है…!
एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मनोभाव होता है.
मुठी से गिरा देते, पाँव से उड़ा देते…
_ सिर्फ सच्चाई ही बनी रहेगी.
कभी – कभी आप एक पल का सही मूल्य तब तक नहीं जान पाते जब तक कि वह एक स्मृति न बन जाए.
इतना खुद को तराशा होता, तो फरिश्ते हो जाते.
*बल्कि* *महत्वपूर्ण यह है कि,* *”सोच” किस उम्र की रखते हो..!!!*