मस्त विचार 2948
जो कुछ भी हूं लेकिन गुनहगार नहीं हूं मैं…
दहलीज हूं दरवाजा हूँ लेकिन दीवार नहीं हूं मैं..
दहलीज हूं दरवाजा हूँ लेकिन दीवार नहीं हूं मैं..
चेहरे पर झुर्रियाँ अपनो से दूरियां.
तब आपका नसीब भी जागा हुआ रहता है,”
चाहे वह खुशी वाले विचार हों, या दुख वाले.
दूसरों की शिनाख्त में तो, हर शख्स माहिर है..
जो वक़्त आने पर वक़्त दिया करते हैं.
जो सही है उसके लिए खड़े रहें, तब भी जब _ इसका मतलब _ आपको अकेले खड़ा होना पड़े.