सुविचार 3141
मैं’ से भागने की कोशिश मत करना _ उससे भागना हो ही नहीं सकता ;
_ क्योंकि बाद में भी वह साथ ही है.!!
_ क्योंकि बाद में भी वह साथ ही है.!!
हम कहाँ कहते हैं कि ये काम तुम्हारा है.
आज आपके पास जो है उसके लिए आभारी रहें, क्योंकि हो सकता है कि कल आपके पास न हो.
जो छूट गया वो लम्हा बेहतर था..!!
ना उसने कभी बांधा ना मैंने कभी छोड़ा…
अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं ;
अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब हैं;
” जीवन का आनन्द मिलजुल कर रहने में ही है ”
हम वहां काम आते हैं..जहां सब साथ छोड़ जाते हैं.
यही जीवन का प्रबंधन कहलाता है.
जब कोई सुनने वाला नहीं होता.