सुविचार 2970
मन की इच्छाए श्रेष्ठ कर्मो में, अच्छे कर्मो में अक्सर बाधा खड़ी करती हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मो को सर्वोपरि मानने वाले इच्छा से रहित होते है, जो योग्य है वही कर्म करते है ! इच्छा शेष होना, इच्छा रहित होना जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है !!!
मन की इच्छाए श्रेष्ठ कर्मो में, अच्छे कर्मो में अक्सर बाधा खड़ी करती हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मो को सर्वोपरि मानने वाले इच्छा से रहित होते है, जो योग्य है वही कर्म करते है ! इच्छा शेष होना, इच्छा रहित होना जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है !!!
हमेशा आप से कोई * बड़ा * होता है.
श्रेष्ठता का आधार हमारी ऊँची सोच पर निर्भर करता है….
अब “आय” में बड़े का सम्मान होता है.
क्योंकि जिंदगी तो, 10% आप इसे कैसे बनाते हैं और 90% आप इसे कैसे अपनाते हैं, यह है.
_ तो यकीन मानिए _ आप उसे कर भी सकते हैं..
इन्ही नजरों से ढूंढोगे ..नज़र जब हम नही आएंगे…!!
जीवन इस बारे में नहीं है कि किसने आपको चोट पहुंचाई और आपको तोड़ दिया, यह इस बारे में है कि कौन हमेशा वहां था और जिसने आपको फिर से हंसाया.
वरना परिस्थितियां तो सदा विपरीत रहती हैं.