सुविचार 2921
समस्याओं से बाहर होने का एक ही द्वार है,
वह द्वार है समस्याओं की समझ.
वह द्वार है समस्याओं की समझ.
फिर भी ना जाने क्यों अकेला सा मन है…!!
सृष्टि की सबसे लंबी दूरियाँ तय करता है..
लेकिन मात्र हमारे सही होने से सामने वाला ग़लत नहीं हो जाता… !!”
क्या यह मज़ेदार नहीं है कि कैसे दिन-ब-दिन कुछ नहीं बदलता, लेकिन जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो सब कुछ अलग होता है ?
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे.
मैंने चुप रहके बाज़ी पलट दी.
वह इंसान बहुत से लोगों को अप्रिय लगने लगता है.
लोग अक्सर दूसरों का सामान खो देते हैं.