मस्त विचार 2694
सिर्फ एक कदम उठा था गलत राहे शौक मे,
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढ़ती रही.
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढ़ती रही.
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ.
अपनी आवाज मत उठाओ, अपने तर्क में सुधार करो.
आज का ये दिन इक उम्र बन के गुज़रा है..!!
जो समय आने पर आपको पूरे ब्याज सहित वापस मिलता है.
कुछ हक़…..दिए नहीं जाते…..लिए जाते हैं..
करने के पहले सोचने वाला बुद्धिमान है,
करने के समय सोचने वाला सतर्क है,
करने के बाद सोचने वाला मूर्ख है.
वे आपको स्पष्ट रूप से देखने नहीं देते.
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं.