सुविचार 2863
हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हक़ीकत बनाने में लगा है.
हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हक़ीकत बनाने में लगा है.
अपनी रजा में अब तू रहना सीखा दे,
शिकायत ना हो कभी भी किसी से,
सुख और दुख के पार जीना सीखा दे..
इंसान बनना भूल जाते हैं..!
तेरी संगत में खुद को,,,,,,,झुकाना सीख गए,
पहले मायूस हो जाते थे,,,,,,,कुछ ना मिलने पर,
अब तेरी रज़ा में,,,,,,राज़ी रहना सीख गए,,,,!!
ऐसे में अपना भला कैसे हो सकता है..??
कभी खुदा की रजा समझ कर…
कभी अपने गुनाहों की सजा समझ कर.
कौन छूता है इस जमीन को, आसमान से टूट कर…
_पर वह उसका उपयोग से ज्यादा दुरूपयोग करता है.!!
वो किसी की परछाई बनने में नहीं !!
यह जरूरतें तो कभी खत्म नहीं होती.