मस्त विचार 2663
एक गलत कदम उठा था राहे शौक में,
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढती रही.
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढती रही.
कीजिए सब कुछ मगर अपनी जरुरत देख कर.
सम्भालने की भी एक हद होती है.
खुशी कोई रेडीमेड चीज नहीं है, यह आपके अपने कार्यों से आती है.
_ किन्तु अपनी काबिलियत तो आप को स्वयं ही ढूंढ़नी होंगी ..
जिन्हें दुनिया कुछ करने लायक नहीं समझती.
जबकि एक असफल इंसान नई चीज़े सीखने से डरता है.
वक़्त ने मौका दिया तो दरिया लौटाएंगे हम उन्हें.
तब दुनिया आपको तलाशती है.