सुविचार 2701
जिंदगी का आखिरी कपड़ा कफन, उसमें भी जेब नहीं.
फिर जिंदगीभर जेब को भरने की खटपट क्यों.
जिंदगी का आखिरी कपड़ा कफन, उसमें भी जेब नहीं.
फिर जिंदगीभर जेब को भरने की खटपट क्यों.
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यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नही….!!
सम्मान के सबसे ईमानदार रूपों में से एक वास्तव में यह सुनना है कि दूसरे को क्या कहना है.
मेरी मुट्ठी से हर इक जुगनू निकल जाता है क्यूँ.
मैं मजबूर अपनी आदत से वो मशहूर अपनी रहमत से.
लेकिन चोट खा कर किसी को माफ़ करना बड़ा मुश्किल है.
_ बहुत-से लोग अपनी निजी ज़िंदगी, अपनी बीमारी और घरेलू समस्याओं को सबके सामने बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और सोचते हैं, इससे लोगों की सहानुभूति उन्हें मिलेगी.
_ जबकि पीठ पीछे यही लोग उनकी इस आदत का मज़ाक बनाते हैं, क्योंकि ये समस्याएं तो सभी की हैं,
_लेकिन हर कोई इन्हें अटेंशन पाने का ज़रिया नहीं बनाता.
Stop judging people for the things you also do in private.
क्योंकि लंबे से लंबे रास्ते एक-एक कदम उठा कर पूरे हो जाते हैं.