सुविचार 2692
संघर्ष जारी रहे …….. क्यों कि……पत्थर आखिरी चोट से टूटता है,
पर पहले की चोटें भी बेकार नहीं जाती.
पर पहले की चोटें भी बेकार नहीं जाती.
“हां में हां” मिला दिया करो…”संबंध” लम्बे समय तक टिकेंगे..
_ समझदार वही है जो उस बात की तह तक खुद जाता है…
पहले मिलता नहीं था, अब गुजरता नहीं है..
एक – साथ आना एक शुरूआत है ; एक साथ रहना प्रगति है; एक साथ काम करना सफलता है.
तो सारा विश्व शान्तिमय प्रतीत होता है.
तेरी एक झलक ही काफी है, मेरे ठीक हो जाने के लिये.
कभी- कभी गुच्छे की आखिरी चाबी ताला खोल देती है.