सुविचार 2744
आँखे भी खोलनी पड़ती है रोशनी के लिए..!
केवल
सूरज के निकलने से अँधेरा नही जाता.!!!!!!!!!
केवल
सूरज के निकलने से अँधेरा नही जाता.!!!!!!!!!
और लोग दूसरों से जलने में ही अपनी जिंदगी बिता देते हैं.
यकीन मानो, दर्द उन्हें भी होता है.
क्योंकि कोई तो है जो हमें पूर्ण दोष रहित बनाने के लिए
अपना दिमाग और समय दे रहा है.
खुशी का मंत्र: खुद को बदलो; नकारात्मक संचार को रोकें; और खुश रहें.
हमारे मन पर किसी का अधिकार थोड़ी है,
समेट लेते है अपनी ‘यादों’ को अपने मन के अंदर,
इसको सब कोई समझ सके _ इतना समझदार कोई थोड़े ही है.
मगर, “मनोबल” कुछ लोगों के पास ही होता है.
वक़्त कभी खुद को बदलते नहीं थकता.