Collection of Thought 729
Don’t raise your voice, improve your argument.
अपनी आवाज मत उठाओ, अपने तर्क में सुधार करो.
अपनी आवाज मत उठाओ, अपने तर्क में सुधार करो.
आज का ये दिन इक उम्र बन के गुज़रा है..!!
जो समय आने पर आपको पूरे ब्याज सहित वापस मिलता है.
कुछ हक़…..दिए नहीं जाते…..लिए जाते हैं..
करने के पहले सोचने वाला बुद्धिमान है,
करने के समय सोचने वाला सतर्क है,
करने के बाद सोचने वाला मूर्ख है.
वे आपको स्पष्ट रूप से देखने नहीं देते.
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं.
बेगुनाह हो कर भी “मैंने” सजायें भुगती हैं.
जो बुरे वक़्त में आपके साथ थे.
लेकिन सिर्फ बातों से.