मस्त विचार 2625
यहां मंजर खामोशियों का है तो फ़िर क्या किया जाये.
यहां मंजर खामोशियों का है तो फ़िर क्या किया जाये.
*यह है* *कि* *वो उन लोगों की भी इज्जत करता है*,
*जिनसे उसे किसी किस्म के* *फायदे की उम्मीद नही होती*..!!
मगर कुछ खामोशियों के ज़ख्म तो और भी गहरे निकले !
वरना, इंसानियत से बड़ा रिश्ता कौन सा है.
_ अब, पैसा ही सब कुछ है.. _कितना बदल गया इंसान ?
बस जरा चुप हो जाएं तो सुनाई देगा.
पर ये भूल जाते हैं कि बीज खुद उन्होंने ही बोया है…
पल दो पल साथ रह कर मेरी आदत ना खराब करो.
बीमारी और कुछ नहीं बल्कि कुदरत का बदला है जो किसी के भी खिलाफ जाने पर ले लेती है.
क्यूँकि
आपने कई बार मौत भी माँगी होती है…
इसलिए उसका धन्यवाद करें…जो आपको आपसे ही बचाता है !!”
बस इंसान ही है जो किसी भी वक्त बदल जाता है.