सुविचार 2721
किन्तु किसी को दुख न पहुँचे, यह तो आप के हाथ में ही है !!!
किन्तु किसी को दुख न पहुँचे, यह तो आप के हाथ में ही है !!!
हम चीजों को वैसे नहीं देखते जैसे वे हैं, हम उन्हें वैसे ही देखते हैं जैसे हम हैं.
जो खुशबु भी दूसरों को देता है और टूटता भी दूसरों के लिए ही है…
कि आपको हराने के लिए लोगों को कोशिशें नहीं…..साजिशें करनी पड़ें…
एक खुदा की इबादत ही थी जो, हर बार टलती गयी…
तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली.
और एक सच ये भी है.. इसे और कहीं ढूँढना संभव नहीं.
तो हमारा इंसान होना व्यर्थ है..
हम कैसे हैं, ये कभी भूल कर भी नहीं सोचा….
लेकिन उन समस्याओं से, मिलने वाली सीख को मत भूलिए.