सुविचार 2716
क्योंकि सफलता का आकलन सदैव दूसरों के द्वारा होता है
जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा…
क्योंकि सफलता का आकलन सदैव दूसरों के द्वारा होता है
जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा…
आप खुद अपनी नज़र के पिंजरे में कैद हो.
क्यूंकि उन्हें हर समाधान में भी समस्या नज़र आती है.
और जैसे हम हैं, वैसा तुम सोच भी नहीं सकते.
मुस्कुराने से ज्यादा समय मुस्कुराने और आलोचना करने से ज्यादा तारीफ करने में बिताएं.
जहां लोग तो बहुत हैं, पर अपना कोई नहीं…
_ हमारी जिदंगी की सफ़लता का बड़ा हिस्सा होता है ..
जो छोड़ दे बीच मे हाथ, उस हाथ का भी “धन्यवाद”
सुख भी आ रहा है,,, अगली बारी उसीकी है,”
वक़्त उसे एक दिन साबित कर ही देगा.