मस्त विचार 2464
*तुम वो गैर हो जिसे मैंने एक पल में अपना माना…*
*तुम वो गैर हो जिसे मैंने एक पल में अपना माना…*
एक जीवन को सुरछित रखता है और दूसरा उसे मधुर बनाता है.
उन लोगों से कभी नफ़रत न करें जो आपसे ईर्ष्या करते हैं, बल्कि उनकी ईर्ष्या का सम्मान करें, _ क्योंकि वे वही हैं _ जो आपको अद्भुत समझते हैं.
#जो कहते थे मुझे तेरी आदत सी हो गयी है..
जीवन का सही आनंद लेने के लिए, मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए.
ताज्जुब है… आँखों का पानी खारा कैसे हो गया…!!
क्योंकि ये दोनों परिवर्तनशील हैं.
और हंस कर दूसरों को सुनाते हैं.
और दुख मे आये को भूल जाते हो.