सुविचार 2580

अन्य प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य *तृष्णा* में जीता है,

_ इसीलिए इसके पास सब कुछ होते हुए भी यह *सर्वाधिक* *दुखी* है.

_ आवश्यकता के बाद *इच्छा* को रोकें, अन्यथा यह अनियंत्रित बढ़ती ही जायेगी, और *दुख* का कारण बनेगी.

तृष्णा चतुर को भी अंधा बना देती है.

Collection of Thought 682

URGENTLY NEEDED… Not BLOOD But,,,,,,,,,,,
An ELECTRICIAN, to restore the current between people, who do not speak to each other anymore…
An OPTICIAN, to change the outlook of people… An ARTIST, to draw a smile on everyone’s face…
A CONSTRUCTION WORKER, to build a bridge between neighbours…
A GARDENER, to cultivate good thoughts…
A PLUMBER, to clear the choked and blocked mindsets…
A SCIENTIST to rediscover compassion…
A LANGUAGE TEACHER for better communication with each other…
Last but not the least, A MATHS TEACHER, for all of us to relearn how to count on each other…

सुविचार 2579

एकता का किला सब से सुदृढ़ होता है. उस के भीतर रह कर कोई भी प्राणी असुरछा अनुभव नहीं करता.

मस्त विचार 2453

जल्द पहुँचने की ख़्वाहिश लिए, सुकून भरी छाँव छोड़ते रहे..

पर कौन जाने इस लंबे सफ़र में, कोई और पेड़ मिले ना मिले…

सुविचार 2578

जितना असरदार एक अच्छा उदाहरण होता है,

उतनी असरदार डाँट- फटकार नहीं होती.

सुविचार 2577

कभी कभी अच्छे लोगों से भी गलतियां होती हैं, लेकिन इसका मतलब हरगिज़ नहीं है कि वो बुरे लोग हैं, बल्कि ये मतलब है के वो भी इंसान हैं.

मस्त विचार 2452

*गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई..*

*परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए…*

सुविचार 2576

*’व्यक्ति ‘ क्या है..?* *ये महत्वपूर्ण नहीं है,*

*परन्तु* *’व्यक्ति में ‘ क्या है..?* *ये बहुत महत्वपूर्ण है…!*

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