सुविचार 2732
*”शब्दों” का और “सोच” का ही।* *अहम किरदार होता है….*
*कभी हम समझ नहीं पाते हैं* *और कभी समझा नहीं पाते हैं…!*
*कभी हम समझ नहीं पाते हैं* *और कभी समझा नहीं पाते हैं…!*
तेरे लिए तू सही, मेरे लिए मैं सही..
_ क्योंकि किसी भी स्थिति में हम केवल एक ही निर्णय ले सकते हैं; हमें विभिन्न निर्णयों की तुलना करने के लिए दूसरा, तीसरा या चौथा जीवन नहीं दिया गया है.
अपनों को अपना बनाये रखना सबसे मुश्किल काम है.
_दूसरों को अपना बनाना अब खत्म होता जा रहा है..!!
जो कहते हैं, और जो करते हैं. सामंजस्य में हो.
मेरी परवारिश ही दर्द ने की है.
और हकीकत ने चुप रह कर जीना सीखा दिया.
जो एक दिन आपको मंजिल तक ले जायेंगे.