मस्त विचार 2558
“मैं” पसंद तो बहुत हूँ सबको,
पर…उनको मेरी जरुरत होती तब…
पर…उनको मेरी जरुरत होती तब…
बरसों से पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया.
हम कभी नहीं समझे, सो अब कुदरत समझा रही है.
किसी भी काम को पूरी लगन के साथ करो.
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साये हैं.
वास्तविकता वह है, जिस पर विश्वास करना बंद करने पर, दूर नहीं होता है.
आप का आज कैसा होना चाहिए, उसमें आप क्या करें, क्या न करें – यह सब पूरी तरह आपके उपर निर्भर है.
अब तू ही बता अब इस से ज़्यादा और कैसे चाहूँ तुझे..
जिस दिन पत्थर बना, लोगों ने देवता मान लिया.
तो इंसान मतलबी न होता.