मस्त विचार 2452
*परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए…*
*परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए…*
*परन्तु* *’व्यक्ति में ‘ क्या है..?* *ये बहुत महत्वपूर्ण है…!*
थोडा आहिस्ता चल… समझने तो दे,
ये पड़ाव है या है मंजिल मेरी.
_फिर उनका उपयोग या दुरुपयोग कोई और ही करते हैं !
क्यों रुके हैं … तेरे कदम … तू फिर से चलने की कोशिश तो कर .!!
माना कि जो न मिल सका उसका अफसोस है .!!
मगर जो पास है उसमें जी भर के जीने की कोशिश तो कर .!!
* उसे सुबह मंदिर पर जाना है* *या शव यात्रा पर जाना है,*
*इसलिये जिंदगी जितनी जीओ मस्ती से जीओ।।*
_ एक ज़ख्म भरता नहीं कि, _ यह एक और ज़ख्म दे देती है..
अगर कोई आपके बारे में कुछ बुरा कहता है,_ तो शायद यह इसलिए है _ क्योंकि उनके पास अपने बारे में कहने के लिए कुछ भी अच्छा नहीं है.
यह आप ही हैं जो जीवन की नहीं सुन रहे हैं.
मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो.
जो अपनी फ़िक्र में ही गुजरे…वह जिंदगी क्या है…
मगर तब तक कई लोग, मेरे दिल से उतर जाएंगे…