मस्त विचार 2524
वक़्त सीखा देता है जीने का हुनर,
फिर नसीब क्या, मुकद्दर क्या, क्या लकीरें हाथ की.
फिर नसीब क्या, मुकद्दर क्या, क्या लकीरें हाथ की.
जब प्रतिभा कड़ी मेहनत नहीं करती है तो कड़ी मेहनत प्रतिभा को मात देती है.
नए चिराग जलाओ तो कोई बात बने.
सम्पूर्णता छिपकर रहती है, अपूर्णता प्रदर्शन करती है
– इसी तरह ज्ञानी सतह पर नहीं रहते, गहराई में जाते हैं.
और बुरे लोग हमारी जिंदगी में सबक.
“पर” काँटों को आज तक नहीं आया, “महक़ने का सलीक़ा”….!!
क्यूंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती है.