Collection of Thought 710
हम चीजों को वैसे नहीं देखते जैसे वे हैं, हम उन्हें वैसे ही देखते हैं जैसे हम हैं.
हम चीजों को वैसे नहीं देखते जैसे वे हैं, हम उन्हें वैसे ही देखते हैं जैसे हम हैं.
जो खुशबु भी दूसरों को देता है और टूटता भी दूसरों के लिए ही है…
कि आपको हराने के लिए लोगों को कोशिशें नहीं…..साजिशें करनी पड़ें…
एक खुदा की इबादत ही थी जो, हर बार टलती गयी…
तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली.
और एक सच ये भी है.. इसे और कहीं ढूँढना संभव नहीं.
तो हमारा इंसान होना व्यर्थ है..
हम कैसे हैं, ये कभी भूल कर भी नहीं सोचा….
लेकिन उन समस्याओं से, मिलने वाली सीख को मत भूलिए.
क्योंकि सफलता का आकलन सदैव दूसरों के द्वारा होता है
जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा…