मस्त विचार 2336
जैसे बिना स्याही का फाउण्टेन पेन.
जैसे बिना स्याही का फाउण्टेन पेन.
और जिन पौधों की परवरिश धूप में होती है वो हर मौसम को झेल लेते हैं.
कि तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे वज़ूद को तरसेगी..
_ तर्क देकर आप अपनी बात साबित तो कर सकते हैं, लेकिन समझा नहीं सकते..!!
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते..
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
लेकिन अपने लिए वो एक यातना बन जाते हैं.
अतः हमें तात्कालिक लाभ नहीं देखते हुए किसी विषय पर विस्तारपूर्वक सोचना चाहिए कि क्या गलत है और क्या सही.
बिना पछतावे के अपने अतीत को स्वीकार करें,_ अपने वर्तमान को आत्मविश्वास से संभालें,_ बिना किसी डर के अपने भविष्य का सामना करें.
_ इसका अर्थ है कि आपने कमियों के परे देखना शुरू कर दिया है..