Collection of Thought 629
प्रेम बुद्धि पर कल्पना की विजय है.
प्रेम बुद्धि पर कल्पना की विजय है.
ताक़त तो उसमें सारा आसमान देखने की होती है.
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
उसके साथ जिया जाता है,
उनके सुधार से परिस्थिति और बिगड़ जाती है.
और जीतना तब आवश्यक हो जाता है, जब लड़ाई अपने आप से हो.
‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और
‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.
मैं तो मस्त मगन हुआ, तेरी शरण में ही सुख पाऊँगा.
एक तो मस्ती इस दुनिया की, पल- पल है भटकावे.
दूजी मस्ती प्रेम तेरे की, हर पल बढ़ती जावे.
बहुत निहारा इस दुनिया को, दर्द ना किसी का बाँटा.
तेरी एक नजर से मिट गयी, मेरे दुख की रेखा.
तुझसे पाकर प्यार अनूठा फिर ना किसी को देखा.
तेरे संग मगन हुआ इस दुनिया को, जग को भुला.
ज़िंदगी में कितने भी पीछे रह जाएँ, फिर भी सैकड़ों लोगों से आगे होगें.
अपनी जगह का लुत्फ़ उठाएँ.
“आपका असली मुकाबला केवल अपने आप से है
अगर आप आज खुद को बीते हुए कल से बेहतर पाते है
तो आपकी यही सबसे बड़ी जीत है !!
लेकिन जिंदगी हर लूजर को एक मौका जरूर देती है
जिसमें वह विनर बन सकता है..