मस्त विचार 2170
_ जिसका अधिक प्रयोग करोगे, वो उभरती व निखरती जाएगी ..
_ जिसका अधिक प्रयोग करोगे, वो उभरती व निखरती जाएगी ..
वह उस से महान है, जो अपने दुःखों को छिपा सके.
सुख शांति की स्थिति में उत्पन्न होता है, अशांति से नहीं.
जो हमारे पैर के आगे ठोकर बन के आता है.
_ ना जाने क्यों लोग, मतलब के लिए मेहरबान होते हैं.
_ ग़र कोई हमारी ज़िंदगी में ऐसा है तो यकीं करिए, हम पर ख़ुदा की मेहर है.!!
याद रखो कि आप स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हो.
आप जो कुछ बल या सहायता चाहो, सब आपके ही भीतर विद्यमान है.
आज क्यूं बेवजह रोने लगा हूँ मैं.
बरसों से हथेलियां खाली ही रहीं मेरी.
फिर आज क्यों लगा सब खोने लगा हूँ मैं.
वो #रास नहीं आये, जिन्हें #चाहा वो साथ नहीं आये !
या अपने “गुरुर” से देख रहे हो !