मस्त विचार 2165
हम वक्त की टहनी पर…, बेठे हैं परिंदों की तरह !!
हम वक्त की टहनी पर…, बेठे हैं परिंदों की तरह !!
नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर, क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर, क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर, क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर, क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर, क्योंकि उससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ.
जिंदगी धूप, तुम घना साया
आज फिर दिल ने एक तमन्ना की
आज फिर दिल को हम ने समझाया
तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया हमने क्या पाया
हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया.
आत्मविश्वास सब से बड़ा दोस्त है.
और दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है.
एक असफलता सफलता के कई रास्ते खोलती है.
_ खुशियों व दुख को नहीं समझ सकते तो उन का प्यार खोखला है.
ऐसा करने पर सफलता सुनिश्चित है.
फितरत तो अच्छी रखिये जनाब,
चेहरों का क्या है, रोज़ बदलते हैं ।
रिश्तों को सहेज कर निभाना,
बड़ी मुक्कदर से ,अब, अपने मिलते हैं ।
शोर मत करिये, विनम्र रहिये,
गरजते बादलों से पानी कम ही बरसते हैं।
बातों की जादूगरी ज्यादा दिन चलती नहीँ,
सिक्के वही चलते है जो खरे होते हैं ।
पैसों की खनक जरूरत के लिये ठीक है,
इसका नशा बीमार कर देता है,
चैन मिलता है खुली हवाओं में,
महलों की चारदीवारी में तो दम घुटता है ।
खुलकर जी लो, हँस लो, बोल लो,
अपनों को निभा लो, सबको अपना बना लो,
जग अपना नहीँ बेगाना है,
कल सबको चले जाना है,
दूर जाने के बाद फिर नज़दीकियों के,
रास्ते कहाँ मिलते है ।
।। पीके ।।
इन्हें खर्च कर के आप कुछ न कुछ हासिल करते हैं. भले ही यह कुछ पश्चात्ताप ही हो.