मस्त विचार 2309
मंजिल पर पहुंचकर लिखूंगा मैं रास्तों की मुश्किलों का जिक्र,
अभी तो बस आगे बढ़ने से ही फुरसत नही,
अभी तो बस आगे बढ़ने से ही फुरसत नही,
उसी प्रकार दूसरों को नीचा दिखाने में नहीं ; ख़ुद को ऊँचा उठाने में समय लगाइए !!
लोगों को क्या मैं दू सलाह.., मैं तो ख़ुद ही कशमकश में हूँ..!!!
_घृणा करना तो बेहद कष्टदायक और बोझिल काम है.
तो मजा जीने का और भी आता है.
कोई हताश हो के बिखर गया…तो कोई संघर्ष करके निखर गया.
छटपटा रहा हूँ मैं अब रहा नहीं जाता.
जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे.