सुविचार 2332
जितना गौर से लोग टकराने के बाद एक दूसरे को देखते हैं,
उतनी गौर से अगर पहले ही देख ले तो टक्कर ही नहीं होती.
उतनी गौर से अगर पहले ही देख ले तो टक्कर ही नहीं होती.
वादे निभा- निभा के थक गया हूं मैं.
नकारात्मक लोगों को खुश करना, आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है.
सारा जीवन शिखर और घाटियाँ है, _ चोटियों को बहुत ऊंचा और घाटियों को बहुत कम न होने दें.
_जो पा लिया, उसे खोया नहीं करते.
For everything you have lost, you have gained something else.
हमेशा मेरे आस पास और नजरों से दूर.
अपनी हैसियत से गिर कर बात करना उससे भी बुरा है.