मस्त विचार 2176
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ.
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ.
उस से अधिक एक बुद्धिमान एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न से सीख सकता है.
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……
प्रेम बुद्धि पर कल्पना की विजय है.
ताक़त तो उसमें सारा आसमान देखने की होती है.
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
उसके साथ जिया जाता है,
उनके सुधार से परिस्थिति और बिगड़ जाती है.
और जीतना तब आवश्यक हो जाता है, जब लड़ाई अपने आप से हो.