सुविचार 2219
कभी हालात के रूप मे, कभी मजबूरीयों के रूप मे !!!
कभी हालात के रूप मे, कभी मजबूरीयों के रूप मे !!!
उससे आप कभी भी जीत नहीं सकते.
आप जैसे हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं.
कांच के खिलौनों को उछाला नहीं जाता,
मेहनत करने से मुश्किलें हो जाती हैं आसान,
क्योंकि हर काम तकदीर पर टाला नहीं जाता.
कि उनके पास सिर्फ पैसे होते हैं.
वो अपने अस्तित्व में मस्त रहती है,
मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं,
*तुलना से बचें और खुश रहें*
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है.
इसलिए…..उन लोगों को जरुर महत्व दें, जो आपको महत्व देते हैं…
महत्वाकांक्षा आसमान के खिलाफ सीढ़ी लगा रही है.