सुविचार 2363
क्योंकि पूरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना कहीं अधिक सरल है.
क्योंकि पूरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना कहीं अधिक सरल है.
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..
इस शब्द में कोई मात्रा नहीं है !
फिर भी अलग अलग मात्रा में सबके पास है !!…
“दुनिया” वालो की पसंद तो पलभर मे बदल जाती है।।”
बस सामने वाले को आपसे कोई काम पड़ना चाहिये….. . . . . . .
जान तब जाती जब तैरना नहीं आता….
परिस्थितियाँ कभी समस्या नहीं बनती
तभी बनती है जब परिस्थितियों से निपटना नहीं आता…
यदि आप वास्तव में कड़ी मेहनत करते हैं और दयालु हैं, तो आश्चर्यजनक चीजें घटित होंगी.
अब यही लोग न मिलने का सबब पूछते हैं.
लेकिन दूसरों के साथ “जुड़ने” पर उसकी कीमत दस गुना बढ़ा देता है.
लेकिन किसी दूसरे की नज़र से देखो तो आपके पास बहुत कुछ है.