मस्त विचार – क्यों मायूसी का मन्जर है – 2048

क्यों मायूसी का मन्जर है,

पल पल घुमड़ता, आँखों में समन्दर है,

जाने किसको उडगति ये अँखियाँ,

किसी पर क्यों आस लगाये बैठी है।

वो रेत को रौंदता नीर की तलाश में,

अडिग, अदम्य, अदभुत साहस,

आँखों मे झील सी गहराई, लक्ष्य भेदती,

हार कर छोड़ देना या लड़ कर पराजित होना,

बस सीख और ग्लानि का अन्तर है ।

करम लिखेंगे माथे की लकीरें ।

क्यों संताप करें क्यों विलाप करें,

सूरज की रोशनी में नहीँ,

अँधेरे में ही दीपक जलता है ।

जो चट्टानों सी मुसीबत में, लहरों से टकराता है,

वो लहरें जिसने डुबाई कश्तियाँ कई,

आकर किनारे पर, पैरों को चूमती है ।

इस जज्बे को, सागर भी फिर पथ देता है,

तेरी हिम्मत, तेरा साहस,

फिर लिखी तकदीर बदल देता है,

पग पग, पल पल, बल देता है,

मायूसियों को खुशियों का मंजर देता है ।

 

।। पीके ।।

सुविचार 2173

हमें अपने विचारों का चयन करने की सीखने की जरुरत ठीक उसी तरह से है, जिस तरह हम प्रतिदिन अपने कपड़ों का चयन करते हैं.

मस्त विचार 2047

बारिश में रख दूँ जिंदगी को ताकि धुल जाए पन्नो की स्याही,

ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी-कभी​।..

सुविचार 2171

सत्य का प्रकट होना…

स्वयं के बचाव के लिए कभी दूसरों पर दोषारोपण न करें और न ही कभी झूठे तथ्यों का सहारा लें, क्यूंकि समय के पास सत्य को प्रकट करने का अपना ही तरीका होता है !!!

सुविचार 2170

किस आदमी का विचार करने का क्रम कैसा है ? असल में वही उसका स्वरुप है.

आदमी लंबाई- चौड़ाई के हिसाब से छोटा नहीं होता, वरन जिस आदमी के मानसिक स्तर की ऊंचाई कम है, वह आदमी ऊंचे सिद्धांत और ऊंचे आदर्शों को नहीं सुन सकता.

सुविचार 2169

हर आदमी बुरा काम करने से पहले अगर उसके अन्जाम के बारे में गहराई से सोच ले तो वो इन्सान बुरा काम नहीं करेगा.
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