सुविचार 2328
अपनी हैसियत से बढ़- चढ़कर बात करना बहुत बुरा है,
अपनी हैसियत से गिर कर बात करना उससे भी बुरा है.
अपनी हैसियत से गिर कर बात करना उससे भी बुरा है.
जिससे हम सुख का मूल्य समझ सकें.
पर जब ये काटते हैं तो बहुत दर्द होता है
और इसके हुए ज़ख्म कभी नहीं भरते.
आप स्वयं भी जैसा चाहते थे वैसा कहाँ बन सके.
मौन रहकर कई समस्याओं को दूर रखा जा सकता है.
आँखों में उम्मीद के ख़्वाब भरो.
अपनी मंजिल खुद तय करो,
इस बेदर्द दुनिया से मत डरो.
जिन्हें हद से ज्यादा वक़्त दिया जाता है.
जीवन उन लोगों के साथ बिताएं जो आपको खुश करते हैं, न कि उन लोगों के साथ _ जिन्हें आपको प्रभावित करना है.
कसूर हर बार गलतियो का नही होता है..