सुविचार 2145
जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में.
जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में.
_ ऐसे लोग सामने कहते कुछ और है और पीछे करते कुछ और..!!
कभी – कभी आपको कठिनाइयों का सामना इसलिए नहीं करना पड़ता कि आप कुछ गलत कर रहे हैं, बल्कि इसलिए कि आप कुछ सही कर रहे हैं..
नदी ने हस कर कहा- जब तक तुझमे मिठास न आ जाये..
जो तकरार होने के बाद भी सिर्फ एक मुस्कुराहट पर पहले जैसा हो जाए…..।।
सत्य के दुर्दिनों की मत पूछो, झूठ की आरती उतारी थी.
कुल मिलाकर है बात इतनी सी, सबको अपनी ख़ुशी ही प्यारी थी.
हमने सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ा था, फिर तो उसकी जबाबदारी थी.
राज गद्दी थी किसकी क़िस्मत में, किसकी क़िस्मत में जाँ निसारी थी.
हाय हमको भी क्या भरोसा था, मानते हैं ये भूल भारी थी.
_ यह तय करता है कि आप कल क्या बनेंगे…
क्योंकि, बहुत सारे लोग आपसे प्यार करते हैं…