मस्त विचार 2105

लहजे में “बदजुबानी” चेहरे पे “नकाब” लिए फिरते हैं,

जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.

Collection of Thought 616

You are your own best friend. Listen to yourself more often than someone else.

किसी और की तुलना में, आप खुद अपने सबसे अच्छे दोस्त हैं, अपने आप को अधिक बार सुनें.

मस्त विचार 2104

दुश्मन कहाँ तैयार किये जाते हैं ?

वे तो आपकी सरलता, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ ही जन्म ले चुके होते हैं…

हाँ हमें इनके बारे में पता तनिक देर से चलता है.

दुश्मन बनाने के लिए किसी का बुरा करने की जरुरत नहीं,

खुद तरक्की कर लो तो दुश्मनों का काफिला खड़ा हो जाएगा.

सुविचार 2229

किसी को धोखा देना एक कर्ज है, जो हमें एक ना एक दिन किसी औरों को चुकाना पड़ता है.

सुविचार 2228

आपको एक भी आदमी ऐसा नहीं मिलेगा, जिसने बगैर प्रारंभिक संघर्ष के अपनी जीवन यात्रा तय की हो. अतः संघर्ष को अपना साथी बनाइये. क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति और महान विचारक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम अपने संबोधन के दौरान अक्सर कहा करते थे, यदि आप पहले प्रयास में फेल कर जाते हैं, तो कभी भी हार मत मानिये, क्योंकि फेल का मतलब असफल होना नहीं है, बल्कि इसके अंग्रेजी चार शब्द “एफएआइएल” का अर्थ है “फर्स्ट अटेंप इन लर्निंग”.

सुविचार 2227

।। तेरे मेरे बोल ।।

इसकी बक उसके पास,

उसकी बक इसके पास,

उलझे कान, बिगडे बोल,

बोल तो संभल कर बोल,

बोल पे ही रिश्ते टिके हैं,

बोल से ही हंसती है दोस्ती,

बोल बोल को टटोल ले,

फिर चाहे जो है मन में,

सब खुल के बोल,

बोलने की भाषा, तुझे मिली है,

बोल बोल गीत बन जाये,

बस तू ऐसी भाषा बोल,

बोलने के दिन हैं दो चार,

छोड़ दे ये रस्साकस्सी,

न हो अपनों से अपनों की दूरी,

सबको अपना मान ले,

रिश्तो में फिर जीवन डा ल दे,

बोल में मिश्री घोल ले,

कल तू चला जाएगा,बस,

रह जायेंगे जग में तेरे बोल,

मांना कोई तुझसे रूठा है,

तू भी किसी से हठ कर बैठा है,

रूठे को मना ले, हठ छोड़

सबको गले लगा ले,

बस यही है जीवन का मोल

तेरे मेरे सबके बोल ।।।।।।।।।।।।

पी के

सुविचार 2226

आम तौर पर लोगों की यह धारणा है कि खुश केवल वही है, जिसके पास दौलत है. लेकिन आप पायेंगे कि कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास दौलत तो बहुत है, पर वे खुश नहीं हैं. उनके शरीर में इतनी बीमारियां हैं कि दौलत का स्वयं के लिए कोई इस्तेमाल नहीं है.

इसके विपरीत आपको कई ऐसे लोग भी मिल जायेंगे, जिनके पास संसाधन तो सीमित हैं, परंतु उनके चेहरे पर गजब का आकर्षण नजर आता है, जो खुशी और शांति से उत्पन्न होती है. दरअसल, हमारे संतोष और खुशी का संबंध केवल धन से नहीं है.

हम अपने मन को व्यवस्थित और संतुलित कर अपार सुख की प्राप्ति कर सकते है.

मस्त विचार 2101

जो लोग आपके इर्द गिर्द रहतें हैं, उन्हें शायद आप बदल न पाएं.

लेकिन उन्हें तो आप बदल ही सकतें हैं, जिनके इर्द गिर्द आप रहना चाहतें हैं.

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