मस्त विचार 2105
जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.
जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.
किसी और की तुलना में, आप खुद अपने सबसे अच्छे दोस्त हैं, अपने आप को अधिक बार सुनें.
वे तो आपकी सरलता, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ ही जन्म ले चुके होते हैं…
हाँ हमें इनके बारे में पता तनिक देर से चलता है.
खुद तरक्की कर लो तो दुश्मनों का काफिला खड़ा हो जाएगा.
“कुछ ने दिये जलाये”…”और कुछ ने घर.”.
मांगी ही नहीं जाती, अब कोई दुआ हमसे…..
इसकी बक उसके पास,
उसकी बक इसके पास,
उलझे कान, बिगडे बोल,
बोल तो संभल कर बोल,
बोल पे ही रिश्ते टिके हैं,
बोल से ही हंसती है दोस्ती,
बोल बोल को टटोल ले,
फिर चाहे जो है मन में,
सब खुल के बोल,
बोलने की भाषा, तुझे मिली है,
बोल बोल गीत बन जाये,
बस तू ऐसी भाषा बोल,
बोलने के दिन हैं दो चार,
छोड़ दे ये रस्साकस्सी,
न हो अपनों से अपनों की दूरी,
सबको अपना मान ले,
रिश्तो में फिर जीवन डा ल दे,
बोल में मिश्री घोल ले,
कल तू चला जाएगा,बस,
रह जायेंगे जग में तेरे बोल,
मांना कोई तुझसे रूठा है,
तू भी किसी से हठ कर बैठा है,
रूठे को मना ले, हठ छोड़
सबको गले लगा ले,
बस यही है जीवन का मोल
तेरे मेरे सबके बोल ।।।।।।।।।।।।
पी के
इसके विपरीत आपको कई ऐसे लोग भी मिल जायेंगे, जिनके पास संसाधन तो सीमित हैं, परंतु उनके चेहरे पर गजब का आकर्षण नजर आता है, जो खुशी और शांति से उत्पन्न होती है. दरअसल, हमारे संतोष और खुशी का संबंध केवल धन से नहीं है.
हम अपने मन को व्यवस्थित और संतुलित कर अपार सुख की प्राप्ति कर सकते है.
लेकिन उन्हें तो आप बदल ही सकतें हैं, जिनके इर्द गिर्द आप रहना चाहतें हैं.