सुविचार 2221
समय का चक्र _ जब घूम- घूम कर वापस आता है.
_ इसे बेवजह चक्रव्यूह मत बनाइए..
_ हर आदमी अपने कर्मों की परिधि तय कर रहा है.. उसे और मत उलझाइए..!!
समय का चक्र _ जब घूम- घूम कर वापस आता है.
_ इसे बेवजह चक्रव्यूह मत बनाइए..
_ हर आदमी अपने कर्मों की परिधि तय कर रहा है.. उसे और मत उलझाइए..!!
अपने आप से इसके बारे में बात मत करो; कार्रवाई करें.
उसी के बारे में सोचो तो फांसला निकले……
कभी हालात के रूप मे, कभी मजबूरीयों के रूप मे !!!
उससे आप कभी भी जीत नहीं सकते.
आप जैसे हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं.
कांच के खिलौनों को उछाला नहीं जाता,
मेहनत करने से मुश्किलें हो जाती हैं आसान,
क्योंकि हर काम तकदीर पर टाला नहीं जाता.
कि उनके पास सिर्फ पैसे होते हैं.
वो अपने अस्तित्व में मस्त रहती है,
मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं,
*तुलना से बचें और खुश रहें*