सुविचार 2122

इंसान अपनी कमाई के हिसाब से नही, अपनी जरूरत के हिसाब से गरीब होता है.

सुविचार 2121

कैसी विडंबना हैं ! कुछ लोग जीते-जी मर जाते हैं, और कुछ लोग मर कर भी अमर हो जाते हैं.

सुविचार 2120

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एक इंसान कि उम्र के हिसाब से उसके दृष्टिकोण कि बात करें तो बीस साल उम्र में इंसान अपनी इच्छा से चलता है, तीस साल में बुद्धि से और चालीस में अपने अनुभव से चलने लगता है – यह एक ‘ ग्रेजुअल प्रोसेस ऑफ़ विज़न ” है.

सुविचार 2119

बोलने से पहले सोच लिया करो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया ही जा सकता है.

मस्त विचार 1994

लोगों ने कुछ दिया तो सुनाया भी बहुत कुछ,

ऐ खुदा…एक तेरा ही दर है, जहां कभी ताना नहीं मिला.

Collection of Thought 594

As one grows older, one becomes wiser and more foolish.

जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता जाता है, एक समझदार और अधिक मूर्ख बन जाता है.

मस्त विचार 1993

जिंदगी मुझे सताती क्यों है, नमूने सा आजमाती क्यों है .

मुफलिसी का दुःख दर्द जो, हमसे ही तू निभाती क्यों है.

माना हो रहा बदन में दर्द , फिर सोने दे जगाती क्यों है.

मिला है खुदा ए रहमो करम, ना मारना तो सुलाती क्यों है.

जोकर सा अभिनय करा के, हंसाकर फिर रुलाती क्यों है.

जाएगा मुफलिसी का समय, तू आज कहंकहाती क्यों है.

होगा खत्म तेल दीपक का, बुझा मुझे जगमगाती क्यों है.

जख्म देना है फितरत तेरी, देख दर्द तू मुस्कुराती क्यों है.

है ललक कुमार में जीने का, मुझे मरना सिखाती क्यों है.

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