इंसान अपनी कमाई के हिसाब से नही, अपनी जरूरत के हिसाब से गरीब होता है.
मस्त विचार 1997
घर अंदर ही अंदर टूट जाते हैं,
मकान खड़े रहते हैं बेशर्मों की तरह.
मस्त विचार 1996
जिंदगी गुजर गई सारी काँटों की कगार पर,
फूलों ने मचाई भी भीड़ तो आ के मजार पर.
सुविचार 2121
कैसी विडंबना हैं ! कुछ लोग जीते-जी मर जाते हैं, और कुछ लोग मर कर भी अमर हो जाते हैं.
मस्त विचार 1995
बड़ी बिगड़ैल हैं ये यादें…..देर रात को टहलने निकलती हैं.
सुविचार 2120
सुविचार 2119
बोलने से पहले सोच लिया करो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया ही जा सकता है.
बोलने से पहले सोच लिया करो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया ही जा सकता है.
मस्त विचार 1994
लोगों ने कुछ दिया तो सुनाया भी बहुत कुछ,
ऐ खुदा…एक तेरा ही दर है, जहां कभी ताना नहीं मिला.
Collection of Thought 594
As one grows older, one becomes wiser and more foolish.
जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता जाता है, एक समझदार और अधिक मूर्ख बन जाता है.
मस्त विचार 1993
जिंदगी मुझे सताती क्यों है, नमूने सा आजमाती क्यों है .
मुफलिसी का दुःख दर्द जो, हमसे ही तू निभाती क्यों है.
माना हो रहा बदन में दर्द , फिर सोने दे जगाती क्यों है.
मिला है खुदा ए रहमो करम, ना मारना तो सुलाती क्यों है.
जोकर सा अभिनय करा के, हंसाकर फिर रुलाती क्यों है.
जाएगा मुफलिसी का समय, तू आज कहंकहाती क्यों है.
होगा खत्म तेल दीपक का, बुझा मुझे जगमगाती क्यों है.
जख्म देना है फितरत तेरी, देख दर्द तू मुस्कुराती क्यों है.
है ललक कुमार में जीने का, मुझे मरना सिखाती क्यों है.






