मस्त विचार 2073
उसने गले लगाकर सारा हिसाब बिगाड़ दिया.
उसने गले लगाकर सारा हिसाब बिगाड़ दिया.
मगर धार काँटों की तेज हो गई उसके सुखने के बाद !!
_और नाम किसी का हो रहा है.._?
_*घी और रुई सदियों से, जलते चले आ रहे हैं…,*_
_*और* लोग कहते हैं, दिया जल रहा है।*
_ तब तक कोई भी आपकी पीठ पर नहीं चढ़ पाएगा..
‘लोहा’ नरम होकर…’औजार’ बन जाता है,
‘सोना’ नरम होकर…’जेवर’* बन जाता है,
‘मिट्टी’ नरम होकर…’खेत’* बन जाती है,
‘आटा’ नरम होता है तो ‘रोटी’ बन जाती है,
ठीक इसी तरह अगर “इंसान” भी नरम हो जाये तो लोगो के “दिलों” मे अपनी जगह बना लेता है.
_सदैव बेहतर की उम्मीद करे !_”खुश रहिये मुस्कुराते रहिये”
कुछ लोग पैदा ही होते हैं; बकवास करने के लिए.
हमारे सभी सपने सच हो सकते हैं, _ अगर हम उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं.