मस्त विचार 2103
“कुछ ने दिये जलाये”…”और कुछ ने घर.”.
सुविचार 2228
मस्त विचार 2102
मांगी ही नहीं जाती, अब कोई दुआ हमसे…..
सुविचार 2227
इसकी बक उसके पास,
उसकी बक इसके पास,
उलझे कान, बिगडे बोल,
बोल तो संभल कर बोल,
बोल पे ही रिश्ते टिके हैं,
बोल से ही हंसती है दोस्ती,
बोल बोल को टटोल ले,
फिर चाहे जो है मन में,
सब खुल के बोल,
बोलने की भाषा, तुझे मिली है,
बोल बोल गीत बन जाये,
बस तू ऐसी भाषा बोल,
बोलने के दिन हैं दो चार,
छोड़ दे ये रस्साकस्सी,
न हो अपनों से अपनों की दूरी,
सबको अपना मान ले,
रिश्तो में फिर जीवन डा ल दे,
बोल में मिश्री घोल ले,
कल तू चला जाएगा,बस,
रह जायेंगे जग में तेरे बोल,
मांना कोई तुझसे रूठा है,
तू भी किसी से हठ कर बैठा है,
रूठे को मना ले, हठ छोड़
सबको गले लगा ले,
बस यही है जीवन का मोल
तेरे मेरे सबके बोल ।।।।।।।।।।।।
पी के
सुविचार 2226
इसके विपरीत आपको कई ऐसे लोग भी मिल जायेंगे, जिनके पास संसाधन तो सीमित हैं, परंतु उनके चेहरे पर गजब का आकर्षण नजर आता है, जो खुशी और शांति से उत्पन्न होती है. दरअसल, हमारे संतोष और खुशी का संबंध केवल धन से नहीं है.
हम अपने मन को व्यवस्थित और संतुलित कर अपार सुख की प्राप्ति कर सकते है.
मस्त विचार 2101
लेकिन उन्हें तो आप बदल ही सकतें हैं, जिनके इर्द गिर्द आप रहना चाहतें हैं.
Collection of Thought 615
व्यक्तिगत परिष्कार कभी भी शैली से बाहर नहीं जाता है.
मस्त विचार 2100
*मैं तो अपने यकीन पर शर्मिन्दा हूँ*
सुविचार 2225
…लकड़ियों के ढेर पे, कुछ घण्टे में राख…..
…बस इतनी-सी है “आदमी की औकात”





