मस्त विचार 1881
वक्त और बेबसी से बेहतर कोई अनुभव नही होता,
यही मन की आंखे खोलता है और रास्ता दिखाता है.
यही मन की आंखे खोलता है और रास्ता दिखाता है.
वो अल्फ़ाज, जिसे सुकून कहते हैं.
इसलिए रचनात्मक, क्रियात्मक कार्य करते रहें. खुल कर जीयें ! खिलकर जीयें ! सड़ कर नहीं जीना चाहिये. मन की पुरानी आदत है, वह खिलानेवाली बातों को भूल ही जाता है.
जो कभी ना खत्म होगी, वो ही दिल की बात हूँ मैं !!
मेरी नजर से देखो हर दिल में खुदा है.
वक़्त की बरसात है कि….थमने का नाम नहीं ले रही…
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार,
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार…जीना इसी का नाम है.