मस्त विचार 1885
सुविचार 2010
1. जब ख़ुशी में हो तो वादा मत करना
2. जब ग़ुस्से में हो तो जवाब मत देना
3. जब दुःखी हो तो फ़ैसला मत करना
मस्त विचार 1884
खुद के अंदर झांकने में क्युं अटकता हूं,
बाँध के झूले भ्रम के क्युं लटकता हूं,
क्या वजह है जो मैं खुद को यू खटकता हूं..
सुविचार 2009
तो इंसान बाहर से ही नहीं अंदर से भी पत्थर बन जाता है.
सुविचार 2008
मस्त विचार 1883
कि हम कैसी ज़मीने और ज़माना छोड़ आए हैं…!!
मस्त विचार 1882
लेकिन जिनके पास धन नही वो धनी को बुरा बोलते हैं.
इसलिए धन को सही या गलत पर निर्णय देना गलत है …. असली रोग “”जलन”” है.
सुविचार 2007
जो लोग जीवन को आनंद के रूप में, सफलता के रूप में और संगीत के रूप में स्वीकार करते हैं, उनका जीवन आनंदमय हो जाता है. ऐसे भी लोग हैं, जो जीवन को निराशा, असफलता और विपत्ति के रूप में स्वीकार करते हैं, लिहाजा उनका जीवन आंसू बन कर बह जाता है.अब प्रश्न यह उठता है कि हम अपने जीवन को आनंद के रूप में स्वीकार करते हैं या दुख के सागर के रूप में स्वीकार करते हैं. हमारे जीवन को इससे कुछ लेना- देना नहीं है.
जीवन तो एक सीधा जीवन है. आप इस जीवन को जिस भी पात्र में रखेंगे, उसका स्वरुप वैसा बन जायेगा. जैसे जल को यदि घड़े में रखेंगे, तो उसका स्वरुप घड़े का बन जायेगा और छोटी लोटकी में रखेंगे, तो वह लोटकी जैसा बन जायेगा. इसलिए जीवन को सही तरीके से जीना बहुत आवश्यक है.
Collection of Thought 572
No One Knows about *’You’* Better than *’Yourself’. *You are the *Writer, Director, Producer & Creator* of Your *Own Life.*
कभी भी दूसरों से *जीवन की परिभाषा* को स्वीकार न करें _ यह आपका जीवन है, इसे स्वयं परिभाषित करें.
आप के बारे में आप से बेहतर कोई नहीं जानता* _ आप अपने *अपने जीवन के *लेखक, निर्देशक, निर्माता हैं.





