मस्त विचार 2049
ऐ ‘ज़िन्दगी’ इसके सिवा कुछ ना दिया तूने….!!
मस्त विचार – क्यों मायूसी का मन्जर है – 2048
पल पल घुमड़ता, आँखों में समन्दर है,
जाने किसको उडगति ये अँखियाँ,
किसी पर क्यों आस लगाये बैठी है।
वो रेत को रौंदता नीर की तलाश में,
अडिग, अदम्य, अदभुत साहस,
आँखों मे झील सी गहराई, लक्ष्य भेदती,
हार कर छोड़ देना या लड़ कर पराजित होना,
बस सीख और ग्लानि का अन्तर है ।
करम लिखेंगे माथे की लकीरें ।
क्यों संताप करें क्यों विलाप करें,
सूरज की रोशनी में नहीँ,
अँधेरे में ही दीपक जलता है ।
जो चट्टानों सी मुसीबत में, लहरों से टकराता है,
वो लहरें जिसने डुबाई कश्तियाँ कई,
आकर किनारे पर, पैरों को चूमती है ।
इस जज्बे को, सागर भी फिर पथ देता है,
तेरी हिम्मत, तेरा साहस,
फिर लिखी तकदीर बदल देता है,
पग पग, पल पल, बल देता है,
मायूसियों को खुशियों का मंजर देता है ।
।। पीके ।।
सुविचार 2173
मस्त विचार 2047
ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी-कभी।..
सुविचार 2172
मस्त विचार 2046
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की.
सुविचार 2171
स्वयं के बचाव के लिए कभी दूसरों पर दोषारोपण न करें और न ही कभी झूठे तथ्यों का सहारा लें, क्यूंकि समय के पास सत्य को प्रकट करने का अपना ही तरीका होता है !!!
सुविचार 2170
आदमी लंबाई- चौड़ाई के हिसाब से छोटा नहीं होता, वरन जिस आदमी के मानसिक स्तर की ऊंचाई कम है, वह आदमी ऊंचे सिद्धांत और ऊंचे आदर्शों को नहीं सुन सकता.
मस्त विचार 2045
लेकीन कोई मिला ही नहीं जो हमे अपना ले.






