मस्त विचार 2040
मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिए !!
मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिए !!
यदि हम जरुरत से ज्यादा ही भविष्य के बारे में सोचने लगेंगे, चिंता करने लगेंगे तो हम हमारा वर्तमान भी बिगाड़ लेंगे, अतः भविष्य के लिए उतना ही सोचना चाहिए जितना जरुरी हो ! कई लोग भविष्य की कल्पनाओं में ही डूबे रहते है याद रखिये भविष्य जब भी आएगा वर्तमान बनकर ही आयेगा यानि भविष्य आयेगा ही नहीं ! तो क्यूँ न उसी की फ़िक्र करे जिससे जीवन में दो चार होना ही है यानी सिर्फ वर्तमान के बारे मे ही सोचे !!! वैसे भी साधारण मनुष्य के भविष्य के बारे में सोची गई बाते १ या २ प्रतिशत ही साकार होती है ज्यादातर कोरी हवाई कल्पना ही सिद्ध होती है !!!
जिसे धारणाओ के चश्मे लगाकर नही देखा जा सकता है …
_दूसरों कि बातें सुन कर उसके प्रति कोई धारणा बना लेना मूर्खता है !
असंतोष प्रगति की पहली आवश्यकता है.
ऐसी हालत में कैसे कह दूँ कि मेरे अपने बहुत हैं.
खुद से मिलने में भी, उम्र गुज़र जाती है.”…!!!
आईना जब बयान देता है
मेरा किरदार इस ज़माने में
बारहा इम्तिहान देता है
पंख अपनी ज़गह पे वाजिब है
हौसला भी उड़ान देता है
जितने मगरूर हुए जाते हैं
मौला उतनी ढलान देता है
बीती बातों को भुलाकर के वो
आज फिर से जुबान देता है
तेरे बदले में किस तरह ले लूँ
वो तो सारा जहान देता है !
सत्य है, मन के हारे हार है; मन के जीते जीत.