सुविचार 1957
और जो बिखर कर निखर जाए वो “व्यक्तित्व” है…!!
और जो बिखर कर निखर जाए वो “व्यक्तित्व” है…!!
और एक छोटा सा सकारात्मक विचार, हमारी निराशा को पल भर में दूर कर सकता है.
यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.
_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!
अपनी बेईमानी को अपनी बुद्धिमानी समझ़ने की.
बेईमान को तो वहम है जिंदगी का.
किसी और के मानकों से खुद को न आंकें, _ आप हमेशा हारेंगे.
_ जो चल रहा है _ जैसा चल रहा है _ सब सही है..
_ ठहरे हुए लोग बस दूसरों पर उंगली उठाना जानते हैं.!!
_ वरना पसंद तो कोई भी किसीको भी कर लेता है..
वो तुम्हारी बची हुई हिम्मत को भी खत्म कर देगा.