जो पहले छ्मा है वह सबसे बहादुर है, जो सबसे पहले छमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है और जो सबसे पहले भूल जाता है, वह सबसे सुखी है.
सुविचार 2034
हमारा पूरा जीवन भीड़ का हिस्सा बना हुआ है. विचारों की भीड़ हो या संगठनों के आदर्श की या व्यक्ति की. अधिकतर व्यक्ति की चेतना में अभिनव कुछ नहीं होता. वह एक रोडमैप बनाता है – बस भीड़ को फॉलो करने का. शिछा में बच्चे वही करते हैं, युवाओं में जिसका ज्यादा क्रेज होता है. परिवार में बच्चे पिता- माता या अपने बड़े या मित्रों को फॉलो करते हैं. यह चलना हर मामले में होता है. सवाल गलत या सही का नहीं. सवाल है कि हमारी चेतना में कुछ नया करने का भाव क्यों नहीं आता, और अगर यह नहीं आता है, तो हम सर्वश्रेष्ठ कहां से दे सकते हैं ? हम उत्कृष्ट कैसे बन सकते हैं.
जब आप किसी महान लछ्य, किसी असाधारण कल्पना से प्रेरित होते हैं तो आपके सभी विचार अपनी सीमाएं तोड़ देते हैं. आपका मस्तिष्क सीमाओं से परे निकल जाता है. आपकी चेतना प्रत्येक दिशा में विस्तृत होती है और आप खुद को एक नये और आश्चर्यजनक दुनिया में पाते हैं, जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
मस्त विचार 1909
शब्दों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए,
आप को और भी बहोत लोग पढ़ते हैं.
सुविचार 2033
जीवन की सभी खुशियों का रहस्य मन की गतिविधि को स्थिर और व्यवस्थित करने में निहित है.
The secret of all happiness lies in the steadying and setting down of the activities of the mind.
मस्त विचार 1908
“स्कूलो” में लिखा होता है, “असूल” तोडना मना है !
बागों में लिखा होता है, “फूल” तोडना मना है !
“खेलों” में लिखा होता है, “रूल” तोडना मना है !
….काश …
रिश्ते, परिवार, दोस्ती में भी यह लिखा होता कि
“साथ” छोङना मना है”
मस्त विचार 1907
ऐ-जिंदगी तू खेलती बहुत है खुशियों से,
हम भी इरादे के पक्के हैं मुस्कुराना नहीं छोडेंगे !!
सुविचार 2032
जिन्दगी की यही रीत है, हार के बाद जीत है. असफलतओं की इस लम्बी कतार के पीछे सफलता तुम्हारी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही है. उसके आने तक धैर्य धारण करो. माना कि रात बहुत लम्बी है, मगर सुबह का सूरज निकलना तय है.
मस्त विचार 1906
ज़िन्दगी जीनी हैं तो तकलीफें तो होंगी ही ..
वरना मरने के बाद तो जलने का भी एहसास नहीं होता…
सुविचार 2031
कोई भी इंसान ऐसे ही अपने आप को नहीं बदलता,
ज़िन्दगी मैं कुछ हादसे ऐसे होते है जो इंसान को बदलने पर मजबूर कर देते हैं.
Collection of Thought 577
The intelligent man finds almost everything ridiculous, the sensible man hardly anything.
बुद्धिमान व्यक्ति को लगभग हर चीज हास्यास्पद लगती है, समझदार व्यक्ति को शायद ही कुछ.






