मस्त विचार 1819
जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं.
जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं.
परिवार में जिम्मेदार व्यक्ति का भी यही हाल होता है.
ग़मों के कभी इतने नखरे नहीं रहे.
जिस समय दूसरे लोग समय ख़राब कर रहे होते हैं.
जमीं अक्सर किनारों से ही खिसका करती है.
जिसमें पैर नहीं दिल थक जाते हैं.
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…मैंने चलना ही छोड़ दिया है.
फासलें अक्सर रिश्तों में…अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने…अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है.
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ …खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने….अपनापन ही छोड़ दिया है.
याद तो करता हूँ मैं सभी को…और परवाह भी करता हूँ सब की,
पर कितनी करता हूँ…बस बताना छोड़ दिया है.
थोड़ा थक सा जाता हूँ अब मैं…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
*यदि आप किसी बात से सहमत नहीं है तो .. *चर्चा करिये*.
*यदि आप को कुछ पसंद नहीं है .. तो *बताइये*.
*लेकिन चुप रह कर किसी *निर्णय तक मत पहुँचिये*.