सुविचार 2026
तो वो नफरत का नही दया का पात्र होता है,
क्योंकि कोई भी समझदार इंसान कभी किसी को दुख नही दे सकता.
तो वो नफरत का नही दया का पात्र होता है,
क्योंकि कोई भी समझदार इंसान कभी किसी को दुख नही दे सकता.
हम क्यों किसी के बारे में बुरा सोच कर अपना “वक्त” और “कर्म” खराब करें..
जो दूसरों से उम्मीद नहीं रखते हैं,
उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं होती है.
मैं उनके कारण क्रोधित हूं…मैं उनके कारण खुश हूं…
हम अपने जीवन को, अपने आप की भावनाओं को,
दूसरों के द्वारा संचालित होने पर निर्भर कर देते हैं,
आप स्वयं अपनी भावनाओं के निर्माता हैं,
इसलिए दूसरों पर निर्भर न रहें..
मेरा अपना साया मुझे धुप में आने के बाद मिला.
वरना हकीकतें तो अक्सर रुला देती है.
जीवन में जब भी स्थितिया बिगड़ जाए, मनमाफिक न हो, कई कोशिशो के बावजूद काम नहीं बन रहा हो तो शान्ति और धैर्य धारण करिए, ऐसे समय को अपनी सहन शक्ति, एकाग्रता और ज्ञान बढाने में लगाइए ! अच्छी पुस्तको को पढ़िये, ध्यान करिए और कुछ नहीं तो बिलकुल शांत, मौन और सहज रहकर अपने कार्य करते रहिये, आपको आश्चर्य होगा किन्तु कुछ समय व्यतीत होने के बाद आपको लगेगा की अच्छा हुआ जो शांत रहे, व्यर्थ क्रोध नहीं किया, क्यूंकि अक्सर इंसान इनसे उभर जाता है किन्तु इस दौरान उसके द्वारा कही गई गलत बातें और गलत कार्य उसे और दुसरो को याद रहते हैं ! जिनका स्मरण अक्सर दुखदायी होता है !!!
और अनुभव हमारे जीवन की सीख है.
किसी के मन को खुश न कर सके, तो सब व्यर्थ है.
कभी हारना तो कभी झुकना तो, कभी सहना, और कभी कभी खुद को हराना भी पड़ता है.