Collection of Thought 574
हमारे जीवन के सभी दुखों और असफलताओं का एक ही कारण है ~ हमारा स्वार्थ और हमारे स्वार्थी स्वभाव से प्रेरित कर्म..!
हमारे जीवन के सभी दुखों और असफलताओं का एक ही कारण है ~ हमारा स्वार्थ और हमारे स्वार्थी स्वभाव से प्रेरित कर्म..!
जितना साहस कोई बात सबके सामने खड़े होकर कहने में लगता है, उतना ही साहस चुपचाप बैठकर हर किसी की बात सुनने के लिए भी चाहिए !!
निर्बल व खाली मन कभी भी समर्थ संकल्प उत्पन्न नहीं कर सकता !! संकल्पवान बनें, विचारो में स्थिरता और दृढ़ता पैदा करें, मन को अभ्यास द्वारा नियंत्रित करें, अच्छे विचार रखें, इससे आपकी आत्मिक शक्ति का विकास होगा ! याद रखें मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!
_ किरदार काबिल हुए तो याद रखे जाएंगे ..
एक साँस भी नही है तेरे बस की, वो ही सुलाता और वो ही जगाता है.
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते….
घोर संकट के समय, विपत्ति के समय और कठिन परिस्थितियों में शांत रहना, सहज रहना और मुस्कुराना संतुलित मन और स्थिर चित्त की निशानी है !! ऐसा तभी संभव है जब आपका मन पर पूर्ण नियंत्रण हो और ये शांति व सहजता और मुस्कुराहट केवल दिखावटी न हो और बाहरी न हो !!!
बड़े मौके पर काम आता है और बड़ा आदमी छोटी सी बात पर औकात दिखाता है..!!