मस्त विचार 1882
लेकिन जिनके पास धन नही वो धनी को बुरा बोलते हैं.
इसलिए धन को सही या गलत पर निर्णय देना गलत है …. असली रोग “”जलन”” है.
लेकिन जिनके पास धन नही वो धनी को बुरा बोलते हैं.
इसलिए धन को सही या गलत पर निर्णय देना गलत है …. असली रोग “”जलन”” है.
जो लोग जीवन को आनंद के रूप में, सफलता के रूप में और संगीत के रूप में स्वीकार करते हैं, उनका जीवन आनंदमय हो जाता है. ऐसे भी लोग हैं, जो जीवन को निराशा, असफलता और विपत्ति के रूप में स्वीकार करते हैं, लिहाजा उनका जीवन आंसू बन कर बह जाता है.अब प्रश्न यह उठता है कि हम अपने जीवन को आनंद के रूप में स्वीकार करते हैं या दुख के सागर के रूप में स्वीकार करते हैं. हमारे जीवन को इससे कुछ लेना- देना नहीं है.
जीवन तो एक सीधा जीवन है. आप इस जीवन को जिस भी पात्र में रखेंगे, उसका स्वरुप वैसा बन जायेगा. जैसे जल को यदि घड़े में रखेंगे, तो उसका स्वरुप घड़े का बन जायेगा और छोटी लोटकी में रखेंगे, तो वह लोटकी जैसा बन जायेगा. इसलिए जीवन को सही तरीके से जीना बहुत आवश्यक है.
No One Knows about *’You’* Better than *’Yourself’. *You are the *Writer, Director, Producer & Creator* of Your *Own Life.*
कभी भी दूसरों से *जीवन की परिभाषा* को स्वीकार न करें _ यह आपका जीवन है, इसे स्वयं परिभाषित करें.
आप के बारे में आप से बेहतर कोई नहीं जानता* _ आप अपने *अपने जीवन के *लेखक, निर्देशक, निर्माता हैं.
यही मन की आंखे खोलता है और रास्ता दिखाता है.
वो अल्फ़ाज, जिसे सुकून कहते हैं.
इसलिए रचनात्मक, क्रियात्मक कार्य करते रहें. खुल कर जीयें ! खिलकर जीयें ! सड़ कर नहीं जीना चाहिये. मन की पुरानी आदत है, वह खिलानेवाली बातों को भूल ही जाता है.
जो कभी ना खत्म होगी, वो ही दिल की बात हूँ मैं !!
मेरी नजर से देखो हर दिल में खुदा है.