मस्त विचार 1882

सब धन चाहते हैं, क्योंकि धन सुख लाता है,

लेकिन जिनके पास धन नही वो धनी को बुरा बोलते हैं.

इसलिए धन को सही या गलत पर निर्णय देना गलत है …. असली रोग “”जलन”” है.

सुविचार 2007

यदि आप अपने जीवन के बारे में उत्तम विचार रखते हो, तो आपका जीवन उत्तम बनेगा और यदि आप जीवन के प्रति नकारात्मक भाव रखते हो, तो आपका सारा जीवन नकारात्मक बन जायेगा. आपके शरीर में जो जीवनी शक्ति है, वह नकारात्मक बन जायेगी. क्योंकि यह सच बात है कि आपका शरीर आपके ही विचारों से प्रभावित होता है. जैसा आपका विचार होगा, वैसा ही आपका जीवन भी होगा.

जो लोग जीवन को आनंद के रूप में, सफलता के रूप में और संगीत के रूप में स्वीकार करते हैं, उनका जीवन आनंदमय हो जाता है. ऐसे भी लोग हैं, जो जीवन को निराशा, असफलता और विपत्ति के रूप में स्वीकार करते हैं, लिहाजा उनका जीवन आंसू बन कर बह जाता है.अब प्रश्न यह उठता है कि हम अपने जीवन को आनंद के रूप में स्वीकार करते हैं या दुख के सागर के रूप में स्वीकार करते हैं. हमारे जीवन को इससे कुछ लेना- देना नहीं है.

जीवन तो एक सीधा जीवन है. आप इस जीवन को जिस भी पात्र में रखेंगे, उसका स्वरुप वैसा बन जायेगा. जैसे जल को यदि घड़े में रखेंगे, तो उसका स्वरुप घड़े का बन जायेगा और छोटी लोटकी में रखेंगे, तो वह लोटकी जैसा बन जायेगा. इसलिए जीवन को सही तरीके से जीना बहुत आवश्यक है.

Collection of Thought 572

Never Accept the *Definition of Life* from Others. It is your Life, *Define* it by Yourself.

No One Knows about *’You’* Better than *’Yourself’. *You are the *Writer, Director, Producer & Creator* of Your *Own Life.*

कभी भी दूसरों से *जीवन की परिभाषा* को स्वीकार न करें _ यह आपका जीवन है, इसे स्वयं परिभाषित करें.

आप के बारे में आप से बेहतर कोई नहीं जानता* _ आप अपने *अपने जीवन के *लेखक, निर्देशक, निर्माता हैं.

सुविचार 2006

पैसा और सफलता इंसान को बदलते नहीं हैं, वे सिर्फ उसे बढ़ा देते हैं जो उनमे पहले से मौजूद है.

सुविचार 2005

ज्यादातर असफल लोग अपनी खराब आदतों, उल्टी सोच, एवं भोगी शरीर के गुलाम होते है.

सुविचार 2004

इंसान कुछ भी करे, रचनात्मक होना चाहिए. यही तो आनंद है जिंदगी का कि आप अपने समय का सदुपयोग कैसे करते हैं या अपनी ऊर्जा को कैसे कामों में लगाते हैं या मन को कैसे व्यस्त रखते हैं. इन सब बातों पर विचार करें.

इसलिए रचनात्मक, क्रियात्मक कार्य करते रहें. खुल कर जीयें ! खिलकर जीयें ! सड़ कर नहीं जीना चाहिये. मन की पुरानी आदत है, वह खिलानेवाली बातों को भूल ही जाता है.

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