सुविचार 1976
एक ‘; मुस्कुराहट ‘; और दूसरी ‘; दुआ ‘;,
हमेंशा बांटते रहिए !! हमेंशा बढ़ती रहेंगी !!
एक ‘; मुस्कुराहट ‘; और दूसरी ‘; दुआ ‘;,
हमेंशा बांटते रहिए !! हमेंशा बढ़ती रहेंगी !!
नदियों को बहने के लिए किसी, पथ की जरूरत नहीं होती.
जो बढ़ते हैं जमाने में, अपने मजबूत इरादों के बल,
उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए, किसी रथ की जरूरत नहीं होती.
बल्कि इतना ही बोलो की लोग आप के बोलने का इन्तजार करें.
“यदि आप दूसरों के साथ कोमल होना चाहते हैं, तो पहले स्वयं के साथ कोमल बनें”
चिरागों के जलते ही…बुझा दी जाती हैं “तीलियाँ”.
जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकती है.
सुना है दोस्तों के भी दोस्त होते हैं.
क्योंकि धूप कितनी भी तेज क्यों न हो, समंदर कभी सूखा नहीं करते.