मस्त विचार 1855
तू आजा मुझमे….फिर तू ही तू रह जाएगा…
तू आजा मुझमे….फिर तू ही तू रह जाएगा…
कभी उस इंसान के लिए मत रोओ जो तुम्हे दुख दे, बस मुस्कुराओ और कहो, शुक्रिया तुमसे से बेहतर किसी को खोजने का मौका देने के लिए.
हम हमेशा अपने दुखों और जिम्मेदारियों से भागते रहते हैं, उनसे बचने के बहाने खोजते रहते हैं. अपनी गलतियों और कमियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं, लेकिन ऐसा करके भी हम खुश नहीं रह पाते. हमें परिस्थितियों से भागना नहीं चाहिए.
देखा जाए तो परोक्ष रूप से मनुष्य के तमाम दुखों और तकलीफों का आधार यह सोच रही है कि मेरे दुख का कारण सामने वाला है. हम परिस्थितियों या किस्मत के साथ भी यही रवैया रखते हैं कि वह बदलें हम नहीं.
गम चाहे कैसा भी हो मै आकर भूल जाता हूँ.
इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं….
सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती.
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.