सुविचार 1972
अगर कोई आपकी बात नहीं समझता है तो, आप अपनी आवाज ऊँची न करें, अपने समझाने का तरीका बदलें.
क्योंकि धूप कितनी भी तेज क्यों न हो, समंदर कभी सूखा नहीं करते.
ज़मीनों की ज़रूरत न रहेगी तुझे..,
देखना ये है आप पूछ किससे रहे हैं.
भला ह्रदय के संकेतों की उपेछा कौन कर सकता है.
क्योकि….वो आपके पीछे अपने जीवन के वो पल खर्च कर रहा है, जो उसको कभी वापस नही मिलेंगे.
खुशी हो या ग़म, बाँट लेंगे आधा आधा हम.
इस पर पैर रखते हो तो ही चुभते हैं.