मस्त विचार 1760
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.
सुविचार 1885
मस्त विचार 1759
“महफिलें” खुद की सजाते हैं और चर्चे हमारे करते हैं.
सुविचार 1884
दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है ! निज अनुशासन, तब पर अनुशासन वाली बात के हिसाब से जो भी बातें या व्यवहार आप दूसरों में देखना चाहते हैं, पहले उसमे स्वयं को ढाले, स्वयं के व्यवहार में वो बाते लायें ! तभी परिवर्तन की उम्मीद लगाएं और तभी परिवर्तन सार्थक होगा ! दूसरों के लिए नियम और सिद्धांत बनाना और बताना तो हर कोई कर सकता है, पर पहले स्वयं पालन कीजिये !!!
मस्त विचार 1758
जब सब मुहं फेर लेते हैं तो खुदा साथ देता है.
सुविचार 1883
यह कठिन कार्य है, क्योंकि बचपन से ही हमारा मानस, हमारी चिंतन प्रणाली का आधार सत्य और ईमानदारी पर आधारित होता है. सृजनात्मक एक मानसिक एवं भावनात्मक मनोवृत्ति है, जो सभी प्रकार के ज्ञान एवं अनुभव को एक नये परीप्रेछ्य में अवलोकन करता है. इसके कारण नये विचारों के आविर्भाव में सहायता मिलती है. मौलिक प्रक्रिया की योजना बनाने और सर्वश्रेष्ठ सेवा तथा उत्पाद के आविष्कार का राह बनाता है, ताकि मानवता की सेवा और बेहतर तरीके से किया जा सके. सृजन तभी संभव है, जब हम चिंतन करें. यह एक साथ अभिनव प्रयोग, नवीन शुरुआत, रचना और भविष्य के सही मूल्यांकन का सम्मिलित रूप है.
मस्त विचार 1757
मुट्ठी भी खाली रहेगी जब पहुँचोगे घाट पर.
सुविचार 1882
मस्त विचार 1756
मुस्कुराया कीजिए बड़ा अच्छा लगता है.





